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एक आलू था - सब लोग उसे चिढ़ाते रहते थे कि आखिर यह कैसा अजीब-सा नाम है तुम्हारा - आलू! आलू तो एक तरकारी होती है। बेचारा आलू जब भी ऐसा सुनता तो रोने लग जाता। बताओ ज़रा वो आलू था कौन! पर वहाँ एक भली-सी बैगन सुंदरी भी थी जो आलू को बिल्कुल नहीं चिढ़ाती थी। उल्टे उसका ख़ूब ध्यान रखती थी।
क्या पता है आलू और बैंगन सुंदरी की कहानी?
आखिर वो बैंगन सुंदरी क्यों नहीं चिढ़ाती थी आलू को?
अब यह तो इस कहानी को पढ़कर ही पता चलेगा!
इस कहानी संग्रह में इसी प्रकार की सोलह बड़ी रोचक कहानियाँ हैं।
इन बाल कहानियों में अनावश्यक विस्तार या उपदेश नहीं है बल्कि और मस्तिष्क को कल्पना की नई उड़ान देकर भावनाओं के जुड़ाव का माध्यम बनती हैं।

About the Author

सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक हैं। सुमित्रानंदन पंत नए युग के प्रवर्तक के रूप में आधुनिक हिंदी साहित्य में उदित हुए। सुमित्रानंदन पंत ऐसे साहित्यकारों में गिने जाते हैं जिनका प्रकृति चित्रण समकालीन कवियों में सबसे बेहतरीन था। इन्होंने बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए कुछ बाल कहानियाँ भी लिखी हैं।इस पुस्तक की संकलनकर्ता और सहलेखिका सुमिता पंत सुमित्रानंदन पंत जी की बेटी हैं।
9780143456063
in stockINR 158
1 1
Aaloo Aur Baigan Sundari

Aaloo Aur Baigan Sundari

ISBN: 9780143456063
₹158
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Details
  • ISBN: 9780143456063
  • Author: Sumitranandan Pant
  • Publisher: Hind Pocket Books
  • Pages: 176
  • Format: Paperback
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Book Description

एक आलू था - सब लोग उसे चिढ़ाते रहते थे कि आखिर यह कैसा अजीब-सा नाम है तुम्हारा - आलू! आलू तो एक तरकारी होती है। बेचारा आलू जब भी ऐसा सुनता तो रोने लग जाता। बताओ ज़रा वो आलू था कौन! पर वहाँ एक भली-सी बैगन सुंदरी भी थी जो आलू को बिल्कुल नहीं चिढ़ाती थी। उल्टे उसका ख़ूब ध्यान रखती थी।
क्या पता है आलू और बैंगन सुंदरी की कहानी?
आखिर वो बैंगन सुंदरी क्यों नहीं चिढ़ाती थी आलू को?
अब यह तो इस कहानी को पढ़कर ही पता चलेगा!
इस कहानी संग्रह में इसी प्रकार की सोलह बड़ी रोचक कहानियाँ हैं।
इन बाल कहानियों में अनावश्यक विस्तार या उपदेश नहीं है बल्कि और मस्तिष्क को कल्पना की नई उड़ान देकर भावनाओं के जुड़ाव का माध्यम बनती हैं।

About the Author

सुमित्रानंदन पंत हिंदी साहित्य में छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक हैं। सुमित्रानंदन पंत नए युग के प्रवर्तक के रूप में आधुनिक हिंदी साहित्य में उदित हुए। सुमित्रानंदन पंत ऐसे साहित्यकारों में गिने जाते हैं जिनका प्रकृति चित्रण समकालीन कवियों में सबसे बेहतरीन था। इन्होंने बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए कुछ बाल कहानियाँ भी लिखी हैं।इस पुस्तक की संकलनकर्ता और सहलेखिका सुमिता पंत सुमित्रानंदन पंत जी की बेटी हैं।

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