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‘एकाकीपन के सौ वर्ष’ की कहानी आपको विस्मित करती है; इसकी अतिरंजनाएँ आपको अवाक् और हास्य के आवेग में विह्वल छोड़ देती हैं; आप एक विराट स्मृति-गाथा के अतिमानवीय मायाजाल में धीरे-धीरे यथार्थ और वास्तविकता के कठोर पत्थरों पर पैर रखते हुए आगे बढ़ते हैं; और इस तरह मानव नियति के साथ बिंधे अनन्त अकेलेपन की एक सामूहिक गाथा के दूसरे छोर तक जाते हैं।

Review

“किसी भी भाषा में पिछले पचास सालों में प्रकाशित महानतम उपन्यास।” —सलमान रुश्दी “लेखक की सर्वश्रेष्ठ रचना और बीसवीं सदी की कालजयी कृतियों में एक।” —ब्रायन मॉर्टन, द टाइम्स एजूकेशनल सप्लीमेंट इस उपन्यास में वर्णित शहर माकोन्दो जिस समय हमें सबसे ज़्यादा मनोरंजक और आकर्षक दिखाई देता है ठीक उस समय भी वह रिसता है, भीतर-भीतर सुलगता और सड़ता रहता है। एक ऐसी जगह जो झूठों और झूठ बोलनेवालों से भरी पड़ी है, फिर भी उससे यथार्थ उबला पड़ता है।...यह एक दक्षिणी अमेरिकी रचना है, जादू का एक लौकिक अंश जिसमें भयावह जन्तु और घटनाएँ भरी पड़ी है।” —रॉबर्ट केली, द न्यूयॉर्क टाइम्स बुक रिव्यू “अगर दक्षिण अमेरिका और कैरीबियाई देश धरती पर नहीं भी होते, तो भी उन्हें इस उपन्यास के आधार पर रचा जा सकता है।” —फ्रेडिड एव्यूलार, द गार्जियन “एक शानदार उपन्यास...अद्भुत, प्यारा और व्यंग्यपूर्ण : इसमें महाकाव्य के उपकरण मौजूद हैं।” —जॉन स्टरॅक, न्यू स्टेट्समैन एंड सोसायटी

About the Author

गाब्रिएल गार्सीया मार्केस (1927-2014) स्पैनिश भाषा के ऐसे रचनाकार थे जिनके लेखन ने समूची दुनिया के साहित्य को प्रभावित किया। उनके उपन्यास ‘एकाकीपन के सौ वर्ष’ को बीसवीं सदी की सबसे महत्त्वपूर्ण कृतियों में शुमार किया जाता है। 1982 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मार्केस की अन्य चर्चित कृतियाँ हैं– ‘आइज़ ऑफ़ ए ब्लू डॉग’ (1947), ‘लीफ़ स्टॉर्म’ (1955), ‘नो वन राइट्स टू द कर्नल’ (1958), ‘इन इविल ऑवर’ (1962), ‘बिग मामाज़ फ्यूनेरल’ (1962), ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड’ (1967), ‘दि ऑटम ऑफ़ द पेट्रियार्क’ (1975), ‘क्रॉनिकल ऑफ़ ए डेथ फोरटोल्ड’ (1981), ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलेरा’ (1985), ‘ऑफ़ लव एंड अदर डिमन्स’ (1994)। अनुवादक के बारे में मनीषा तनेजा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में स्पैनिश भाषा और साहित्य पढ़ाती हैं। उन्होंने अंग्रेज़ी, हिन्दी और स्पैनिश में कई कृतियों का अनुवाद किया है जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता पाब्लो नेरूदा के संस्मरण ‘हाँ, मैंने ज़िन्दगी जी है’ और नादीन गॉर्डिमर का कहानी-संग्रह ‘छलांग’ शामिल हैं। उन्होंने तुर्की लेखक हकान गुंडे, स्पैनिश लेखिका मेर्से रूदोरेदा की कृतियों का अनुवाद भी किया है। हाल में अमिताभ घोष के उपन्यास ‘गन आइलैंड’ का उनका अनुवाद ‘बन्दूक द्वीप’ बहुचर्चित रहा है।
9789390971091
out of stock INR 449
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Ekakipan Ke Sau Varsh

Ekakipan Ke Sau Varsh

ISBN: 9789390971091
₹449
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Details
  • ISBN: 9789390971091
  • Author: Gabriel Garcia Marquez
  • Publisher: Rajkamal Classics
  • Pages: 440
  • Format: Paperback
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Book Description

‘एकाकीपन के सौ वर्ष’ की कहानी आपको विस्मित करती है; इसकी अतिरंजनाएँ आपको अवाक् और हास्य के आवेग में विह्वल छोड़ देती हैं; आप एक विराट स्मृति-गाथा के अतिमानवीय मायाजाल में धीरे-धीरे यथार्थ और वास्तविकता के कठोर पत्थरों पर पैर रखते हुए आगे बढ़ते हैं; और इस तरह मानव नियति के साथ बिंधे अनन्त अकेलेपन की एक सामूहिक गाथा के दूसरे छोर तक जाते हैं।

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“किसी भी भाषा में पिछले पचास सालों में प्रकाशित महानतम उपन्यास।” —सलमान रुश्दी “लेखक की सर्वश्रेष्ठ रचना और बीसवीं सदी की कालजयी कृतियों में एक।” —ब्रायन मॉर्टन, द टाइम्स एजूकेशनल सप्लीमेंट इस उपन्यास में वर्णित शहर माकोन्दो जिस समय हमें सबसे ज़्यादा मनोरंजक और आकर्षक दिखाई देता है ठीक उस समय भी वह रिसता है, भीतर-भीतर सुलगता और सड़ता रहता है। एक ऐसी जगह जो झूठों और झूठ बोलनेवालों से भरी पड़ी है, फिर भी उससे यथार्थ उबला पड़ता है।...यह एक दक्षिणी अमेरिकी रचना है, जादू का एक लौकिक अंश जिसमें भयावह जन्तु और घटनाएँ भरी पड़ी है।” —रॉबर्ट केली, द न्यूयॉर्क टाइम्स बुक रिव्यू “अगर दक्षिण अमेरिका और कैरीबियाई देश धरती पर नहीं भी होते, तो भी उन्हें इस उपन्यास के आधार पर रचा जा सकता है।” —फ्रेडिड एव्यूलार, द गार्जियन “एक शानदार उपन्यास...अद्भुत, प्यारा और व्यंग्यपूर्ण : इसमें महाकाव्य के उपकरण मौजूद हैं।” —जॉन स्टरॅक, न्यू स्टेट्समैन एंड सोसायटी

About the Author

गाब्रिएल गार्सीया मार्केस (1927-2014) स्पैनिश भाषा के ऐसे रचनाकार थे जिनके लेखन ने समूची दुनिया के साहित्य को प्रभावित किया। उनके उपन्यास ‘एकाकीपन के सौ वर्ष’ को बीसवीं सदी की सबसे महत्त्वपूर्ण कृतियों में शुमार किया जाता है। 1982 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मार्केस की अन्य चर्चित कृतियाँ हैं– ‘आइज़ ऑफ़ ए ब्लू डॉग’ (1947), ‘लीफ़ स्टॉर्म’ (1955), ‘नो वन राइट्स टू द कर्नल’ (1958), ‘इन इविल ऑवर’ (1962), ‘बिग मामाज़ फ्यूनेरल’ (1962), ‘वन हंड्रेड इयर्स ऑफ़ सॉलिट्यूड’ (1967), ‘दि ऑटम ऑफ़ द पेट्रियार्क’ (1975), ‘क्रॉनिकल ऑफ़ ए डेथ फोरटोल्ड’ (1981), ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलेरा’ (1985), ‘ऑफ़ लव एंड अदर डिमन्स’ (1994)। अनुवादक के बारे में मनीषा तनेजा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पी-एच.डी. करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय में स्पैनिश भाषा और साहित्य पढ़ाती हैं। उन्होंने अंग्रेज़ी, हिन्दी और स्पैनिश में कई कृतियों का अनुवाद किया है जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता पाब्लो नेरूदा के संस्मरण ‘हाँ, मैंने ज़िन्दगी जी है’ और नादीन गॉर्डिमर का कहानी-संग्रह ‘छलांग’ शामिल हैं। उन्होंने तुर्की लेखक हकान गुंडे, स्पैनिश लेखिका मेर्से रूदोरेदा की कृतियों का अनुवाद भी किया है। हाल में अमिताभ घोष के उपन्यास ‘गन आइलैंड’ का उनका अनुवाद ‘बन्दूक द्वीप’ बहुचर्चित रहा है।

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