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जिधर कुछ नहीं 21 वीं सदी के बढ़ते अँधेरे और उठते तापमान के समानांतर नयी संरचना ढूँढने और पाने वाला नितांत मौलिक काव्याकार है। किताब में उत्तर कथन के तौर पर कवि देवी प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित लंबा आलेख काव्य प्रक्रिया को समझने के बहाने राजकीय दमन और कविता के बीच के रिश्ते के बारे में विस्मयकारी सूझ देता है। कविता और विचार की संगत कर रहे हैं सुख्यात चित्रकर्त्री हेम ज्योतिका के चित्र और रेखांकन तथा उद्भव मिश्र के शिल्पाकार। जिधर कुछ नहीं नये प्रबोध और नये शिल्प की अनोखी किताब है।

9789393768452
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Jidhar Kuchh Nahin

Jidhar Kuchh Nahin

ISBN: 9789393768452
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Details
  • ISBN: 9789393768452
  • Author: Devi Prasad Mishra
  • Publisher: Rajkamal Prakashan
  • Pages: 112
  • Format: Paperback
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Book Description

जिधर कुछ नहीं 21 वीं सदी के बढ़ते अँधेरे और उठते तापमान के समानांतर नयी संरचना ढूँढने और पाने वाला नितांत मौलिक काव्याकार है। किताब में उत्तर कथन के तौर पर कवि देवी प्रसाद मिश्र द्वारा लिखित लंबा आलेख काव्य प्रक्रिया को समझने के बहाने राजकीय दमन और कविता के बीच के रिश्ते के बारे में विस्मयकारी सूझ देता है। कविता और विचार की संगत कर रहे हैं सुख्यात चित्रकर्त्री हेम ज्योतिका के चित्र और रेखांकन तथा उद्भव मिश्र के शिल्पाकार। जिधर कुछ नहीं नये प्रबोध और नये शिल्प की अनोखी किताब है।

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