1947 में हिंदुस्तान को आज़ादी मिली, साथ विभाजन हुआ जिससे एक अलग इस्लामी राष्ट्र पाकिस्तान बना। इस विभाजन और आजादी से भारत की जनता को राजनीतिक और धार्मिक स्वतंत्रता की उम्मीद बंधी थी, लेकिन मिला, भयानक विस्थापन और मौत का साथ। मानव-गरिमा भी चोटिल हुई : हजारों महिलाएँ बलात्कार की शिकार हुईं और कोई दस लाख लोग मारे-काटे गए, वहीं करोड़ों को मजबूरन घर-बार छोड़ शरणार्थी शिविरों में शरण लेनी पड़ी। इसने बहुत-सी जानों के बदले चंद लोगों को लाभ पहुँचाया। यह 20वीं सदी में उपनिवेशी व्यवस्था से मुक्ति की पहली घटना भले ही थी लेकिन इसकी क्रूरता दिल दहलाऊ साबित हुई।
विभाजन, व्यावहारिक जीवन को किस रूप में बदलने वाला था और आम जनता को कितना व किस तरह प्रभावित करने वाला था ― यास्मीन ख़ान ने इन छूट गए प्रश्नों को बेनक़ाब किया, और सघन स्रोतों से सूचनाएँ जुटाकर, इस संकट से हुई तमाम क्षति के हवाले से बताया कि विभाजन की लपट पचहत्तर वर्षों बाद भी क्यों भभकती रहती है, क्यों आज भी परेशान करने वाले कई सवाल हमारे-आपके मन में उठते रहते हैं।
About the Author
लंदन में जन्मीं यास्मीन ख़ान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ब्रिटिश इतिहास की व्याख्याता और केलॉग कॉलेज की फेलो हैं। द ग्रेट पार्टिशन उनकी पहली किताब है जिसने रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी से ग्लैडस्टोन पुरस्कार जीता। इसी का हिंदी अनुवाद है, विभाजन : भारत और पाकिस्तान का उदय।