बाग़ी फिरंगी; भारत की आज़ादी के पश्चिमी योद्धा उन लगभग सात गुमनाम लोगों की कहानियों का संग्रह है जिन्होंने भारत की आज़ादी की लड़ाई में अपना अहम योगदान दिया और तकलीफें सहीं । वे जानते थे कि इसके लिए उन्हें जेल हो सकती है और ज़िंदगी भर भारत में भी रहना पड़ सकता है। वे लोग अमेरिका, इंग्लैंड और आयरलैंड के रहने वाले थे और उनमें पुरुष और महिलाएँ दोनों ही शामिल थीं। उन्होंने पत्रकारिता, समाज सुधार, ऑर्गेर्निक खेती आदि क्षेत्रों में ऐसा काम किया जिनका प्रभाव पीढ़ियाँ बीत जाने के बाद भी कायम है और जिन्हें कई संस्थानों द्वारा संरक्षित किया गया है। इनमें सभी लोग गांधी से संबंधित थे और कई उनसे गहरा मतभेद भी रखते थे। मशहूर इतिहासकार रामचंद्र गुहा की लिखी इस पुस्तक से भारत और पश्चिम के बीच के संबंधों का एक नए दृष्टिकोण से परिचय होता है । यह पुस्तक बताती है कि उस दौर में भारत उपनिवेशवाद से इतर भी अपनी पहचान और स्वाधीनता की खोज में किस कदर अलग तरीके से जुटा हुआ था।
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रामचंद्र गुहा हमारे दौर के महत्वपूर्ण इतिहासकार हैं जिनकी गांधी शृंखला की पुस्तकें काफी प्रसिद्ध हुई हैं। उन्होंने महात्मा गांधी की वृहत और प्रामाणिक जीवनी गांधी;द ईयर्स दैट चेंज्ड द वर्ल्ड, गांधी बिफोर इंडिया और इंडिया आफ्टर गांधी नामकी पुस्तकों का लेखन किया है। साथ ही उन्होंने पर्यावरण और क्रिकेट से संबंधित भी कई पुस्तकें लिखी हैं। रामचंद्र गुहा को साहित्य अकादमी समेत कई पुरस्कार मिल चुके हैं।