‘जब तक आप इस पुस्तक को पढ़ना समाप्त करेंगे, तब तक आप एक बात के बारे में सुनिश्चित हो सकते हैं-अपने भीतर के लीडर की पहचान करना।’ -दीपक चोपड़ा , एम. डी. ‘फर्श से अर्श तक पहुँचने की श्रीधर बेवरा की कहानी वास्तव में प्रेरणादायक है। यह मुझे उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करती है।’ -डॉ. शशि थरूर जंगल में आपका स्वागत है। यहाँ का सबसे बड़ा सच यह है कि ताक़तवर ही ज़िंदा रह सकता है। कमज़ोर जानवरों को ताक़तवर अपना भोजन बना लेते हैं। इसे स्वाभाविक रूप से खाद्य श्रंखला माना जाता है, लेकिन कुछ जीव अपने निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए जैविक व्यवस्था से छेड़छाड़ कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर क़त्लेआम कर रहे हैं। पूर्वी अ़फ्रीका के जंगलों में शक्तिशाली सिंह राजा कैज़ार का स्वेच्छाचारी रवैया अपनी प्रजा पर कहर बरपा रहा है। उसे शेरों के समूह में सबसे लंबी अवधि तक शासन करने वाले राजा के तौर पर जाना जाता है। उसका मंत्री चतुर शाका है। पहले वह भेड़ों के झुंड का लीडर था, लेकिन शक्तिशाली शेरों के लिए उसने अपने झुंड से विश्वासघात किया। अपनी रक्षा की रणनीति का खुलासा होने के बाद भेड़ अत्यंत संकट की स्थिति फँस गए थे। भेड़ आख़िर कैसे संहार को रोकते हैं और कहाँ पनाह लेते हैं? क्या वे अपनी नस्ल की नियति को बदल सकते हैं और जंगल के क़ानून को बहाल कर सकते हैं? क्या भयभीत भेड़ों का झुंड दहाड़ना सीख सकता है? यहाँ नेतृत्व को लेकर एक ज्ञानवर्धक कहानी उभर कर सामने आती है। अस्तित्व बचाए रखने में सहायक जंगल की सियासत और रणनीतियाँ, दरअसल ऐसे सबक़ हैं जिनका स्थायी मूल्य है। ये सबक़ न केवल आपको प्रेरित करते हैं, बल्कि आपके भीतर छिपे लीडर को खोजने में मदद भी करते हैं।
About the Author
श्रीधर बेवरा बेस्टसेलिंग लेखक, मोटिवेशनल स्पीकर, रणनीतिक सलाहकार और सीनियर कॉरपोरेट रहनुमा हैं। वे वैश्विक प्रबंधन और प्रौद्योगिकी सलाहकार फ़र्म बीएमआर इनोवेशंस के सीईओ हैं जिसके दफ़्तर दुबई (यूएई), भारत और अमेरिका में हैं। इसके पहले वे पेनासोनिक कॉरपोशन के वरिष्ठ नेतृत्व में शामिल थे और मध्य-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रमुख थे। अपने पच्चीस साल के अनुभव के दौरान वे एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स, डोमेटिक ग्रुप, द हिंदू और द ताज ग्रुप ऑफ़ होटल्स में विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। सड़क पर रेहड़ी लगाने से लेकर, बैरा और घर-घर जाने वाले डिलीवरी बॉय से लेकर आख़िरकार प्रमुख कॉरपोरेट बोर्ड तक पहुंचने वाले श्रीधर बेवरा का जीवन एक उदाहरण है कि सही संकेतों को पहचानने और अपनाने से आपको अपनी पूर्ण नेतृत्व क्षमता का अहसास हो सकता है। उनकी पहली किताब, मोमेंट ऑफ़ सिग्नल में बताया गया है कि कोई भी इस अवधारणा का उपयोग शीर्ष पर पहुंचने के लिए किस तरह से कर सकता है। श्रीधर ने आईआईएम अहमदाबाद, आईआईएम विशाखापत्तनम, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मद्रास, एसपी जैन यूनिवर्सिटी, अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ़ शारजाह, अजमान यूनिवर्सिटी और अमीरात एनबीडी सिक्योरिटीज सहित तमाम मंचों पर लीडरशिप के बारे में मुख्य भाषण दिए हैं। वे फ़ोर्ब्स मध्य पूर्व में लीडरशिप के बारे में नियमित रूप से लिखते हैं। श्रीधर 2017 में बड़े भाई मुरलीधर बेवरा के निधन के बाद उनके नाम पर स्थापित एक धर्मार्थ संस्था bmrtrust.org के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। श्रीधर अपना समय संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और भारत में बिताते हैं।