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अगर आप इस पुस्तक से सबक़ सीख लेते हैं, तो आप प्रबंधन व नेतृत्व संबंधी सारी समकालीन पुस्तकों को बिना पढ़े छोड़ सकते हैं। - न्यूज़वीक यह पुस्तक व्यवसाय से लेकर खेल तक किसी भी प्रतिस्पर्धी गतिविधि में सफलता की राह दिखाती है। - एशियन रिव्यू ऑ़फ बुक्स द आर्ट ऑफ़ वॉर संसार का सबसे पुराना सैन्य ग्रंथ है। इसे 2,500 साल पहले लिखा गया था, लेकिन यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना कि तब था। सेल्समैनशिप हो या कारोबार, आप चाहे किसी भी क्षेत्र में हों, अगर आपके सामने कोई प्रतिस्पर्धी है जिसे हराकर आप जीतना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी मदद कर सकती है। • फ्रांस के सम्राट नेपोलियन ने सुन त्ज़ू की इस पुस्तक को पढ़ा था और युद्ध में इसका इस्तेमाल किया था। • साम्यवादी चीनी नेता माओ जे दॉन्ग ने 1949 में चियांग काई-शेक पर अपनी विजय का श्रेय इस पुस्तक को दिया था। • वियतनाम में जनरल गियाप ने इसी पुस्तक के सिद्धांतों पर चलकर फ्रांसीसी और अमेरिकी सेनाओं पर विजय हासिल की थी। वियतनाम में अमेरिका की हार के बाद ही सुनत्ज़ू की इस पुस्तक पर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का ध्यान गया।
9789355431509
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The Art Of War (hindi)

ISBN: 9789355431509
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Details
  • ISBN: 9789355431509
  • Author: Sun Tzu Sudhir Dixit
  • Publisher: Manjul
  • Pages: 114
  • Format: Paperback
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Book Description

अगर आप इस पुस्तक से सबक़ सीख लेते हैं, तो आप प्रबंधन व नेतृत्व संबंधी सारी समकालीन पुस्तकों को बिना पढ़े छोड़ सकते हैं। - न्यूज़वीक यह पुस्तक व्यवसाय से लेकर खेल तक किसी भी प्रतिस्पर्धी गतिविधि में सफलता की राह दिखाती है। - एशियन रिव्यू ऑ़फ बुक्स द आर्ट ऑफ़ वॉर संसार का सबसे पुराना सैन्य ग्रंथ है। इसे 2,500 साल पहले लिखा गया था, लेकिन यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना कि तब था। सेल्समैनशिप हो या कारोबार, आप चाहे किसी भी क्षेत्र में हों, अगर आपके सामने कोई प्रतिस्पर्धी है जिसे हराकर आप जीतना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपकी मदद कर सकती है। • फ्रांस के सम्राट नेपोलियन ने सुन त्ज़ू की इस पुस्तक को पढ़ा था और युद्ध में इसका इस्तेमाल किया था। • साम्यवादी चीनी नेता माओ जे दॉन्ग ने 1949 में चियांग काई-शेक पर अपनी विजय का श्रेय इस पुस्तक को दिया था। • वियतनाम में जनरल गियाप ने इसी पुस्तक के सिद्धांतों पर चलकर फ्रांसीसी और अमेरिकी सेनाओं पर विजय हासिल की थी। वियतनाम में अमेरिका की हार के बाद ही सुनत्ज़ू की इस पुस्तक पर अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का ध्यान गया।

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